घने जंगल में एक अनोखी चिड़िया रहती थी, जिसका नाम था कैसोवैरी। वह दिखने में तो चिड़िया थी, पर बाकी चिड़ियों की तरह उड़ नहीं सकती थी। उसके पंख छोटे और शरीर भारी था, इसलिए वह अधिकतर जमीन पर ही रहती थी। बचपन से ही दूसरी चिड़ियों के बच्चे उसे देखकर मज़ाक उड़ाते थे।
कोई कहता, “अरे, जब तू उड़ ही नहीं सकती तो चिड़िया किस काम की?”
कोई पेड़ की ऊँची डाल पर बैठकर चिल्लाता, “कभी हमारे पास भी आ जाया कर… हर समय जानवरों की तरह नीचे ही घूमती रहती है!”
इतना कहकर सब जोर-जोर से हँसने लगते। शुरू-शुरू में कैसोवैरी इन बातों को अनदेखा कर देती थी। वह सोचती थी कि शायद एक दिन सब उसे समझेंगे। लेकिन रोज़-रोज़ के तानों और मज़ाक ने धीरे-धीरे उसके दिल को दुखी कर दिया।
एक दिन वह बहुत उदास होकर एक पेड़ के नीचे बैठ गई। उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसने आसमान की ओर देखते हुए कहा,
“हे ईश्वर! आपने मुझे चिड़िया क्यों बनाया? और अगर बनाया तो मुझे उड़ने की शक्ति क्यों नहीं दी? देखिए, सब मेरा मज़ाक उड़ाते हैं। अब मैं इस जंगल में एक पल भी नहीं रहना चाहती। मैं इस जगह को हमेशा के लिए छोड़कर जा रही हूँ।”
यह कहकर कैसोवैरी धीरे-धीरे जंगल से बाहर जाने लगी। वह कुछ ही दूर पहुँची थी कि पीछे से एक भारी आवाज़ सुनाई दी—
“रुको कैसोवैरी! तुम कहाँ जा रही हो?”
कैसोवैरी ने आश्चर्य से पीछे मुड़कर देखा। सामने एक बड़ा-सा जामुन का पेड़ खड़ा था। वही उससे बात कर रहा था।
पेड़ ने प्यार से कहा,
“कृपया तुम यहाँ से मत जाओ। हमें तुम्हारी बहुत ज़रूरत है। पूरे जंगल में पेड़-पौधों के फलने-फूलने में तुम्हारा बहुत बड़ा योगदान है। तुम अपनी मजबूत चोंच से फलों को खाती हो और उनके बीज पूरे जंगल में बिखेर देती हो। उन्हीं बीजों से नए पेड़ उगते हैं और जंगल हरा-भरा बना रहता है।”
पेड़ ने आगे कहा,
“हो सकता है बाकी चिड़ियों के लिए तुम्हारा कोई महत्व न हो, लेकिन हमारे लिए तुम बहुत महत्वपूर्ण हो। तुम जैसी चिड़िया इस जंगल में और कोई नहीं है। तुम्हारी जगह कोई नहीं ले सकता। इसलिए कृपया हमें छोड़कर मत जाओ।”
पेड़ की बातें सुनकर कैसोवैरी की आँखों में चमक आ गई। उसे पहली बार महसूस हुआ कि वह इस दुनिया में बेकार नहीं है। भगवान ने उसे भी एक खास काम के लिए बनाया है। सिर्फ उड़ नहीं पाने से वह किसी से कम नहीं हो जाती है
अब उसका मन हल्का और खुश हो गया। उसने सोचा कि दूसरों की बातों से दुखी होना ठीक नहीं। हर किसी के अंदर कोई न कोई खास गुण होता है।
कैसोवैरी मुस्कुराई और खुशी-खुशी वापस जंगल की ओर लौट गई। अब वह पहले की तरह उदास नहीं थी। उसे अपने अस्तित्व और अपने महत्व का एहसास हो चुका था।
शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी दूसरों से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए। हर इंसान अपने आप में अनोखा और खास होता है। भगवान ने हर किसी को किसी न किसी विशेष उद्देश्य के लिए बनाया है। इसलिए हमें अपने गुणों को पहचानना चाहिए और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीना चाहिए।