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Friday, December 12, 2025

पाप बेचने वाली

एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये | वहाँ एक महिला बैठी मिली | उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी |
 कालिदास ने उस महिला से पूछा : क्या बेच रही हो ? 
महिला ने जवाब दिया : महाराज ! मैं पाप बेचती हूँ | 
कालिदास ने आश्चर्यचकित होकर पूछा : पाप और मटके में ? 
 महिला बोली :हाँ , महाराज ! मटके में पाप है
कालिदास : कौन-सा पाप है ? 
महिला : आठ पाप इस मटके में है |में चिल्लाकर कहती हूँ की मैं पाप बेचती हूँ पाप और लोग पैसे देकर पाप ले जाते है|
अब महाकवि कालिदास को और आश्चर्य हुआ पैसे देकर लोग पाप ले जाते है ? 
महिला : हाँ , महाराज ! पैसे से खरीदकर लोग पाप ले जाते है | 
कालिदास : इस मटके में आठ पाप कौन-कौन से है ?
महिला : क्रोध ,बुद्धिनाश , यश का नाश , स्त्री एवं बच्चों के साथ अत्याचार और अन्याय ,चोरी , असत्य आदि दुराचार , पुण्य का नाश , और
स्वास्थ्य का नाश … ऐसे आठ प्रकार के पाप इस घड़े में है | 
कालिदास को कौतुहल हुआ की यह तो बड़ी विचित्र बात है |
किसी भी शास्त्र में नहीं आया है की मटके में आठ प्रकार के पाप होते है |
वे बोले : आखिरकार इसमें क्या है ?
 महिला : महाराज ! इसमें शराब है शराब ! 
कालिदास महिला की कुशलता पर प्रसन्न होकर बोले :तुझे
धन्यवाद है ! शराब में आठ प्रकार के पाप है यह तू जानती है
और मैं पाप बेचती हूँ ऐसा कहकर बेचती है फिर भी लोग ले
जाते है |